गोदामों में खराब हो रहा हजारों क्विंटल प्याज, महाराष्ट्र के सरकारी गोदामों में नाफेड का भारी नुकसान…

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नासिक के लासलगांव में बीएआरसी की एक यूनिट में है, रेडिएट नहीं किया गया प्याज
गोदामों में खराब हो रहा हजारों क्विंटल प्याज.
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नासिक के लासलगांव में BRC की एक यूनिट में  है, रेडिएट नहीं किया गया प्याज

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. महाराष्ट्र के सरकारी गोदामों में नाफेड द्वारा बड़ी मात्रा में खरीदा गया प्याज खराब हो रहा है। नाफेड ने किसानों से ये प्याज 1100 रुपए क्विंटल के भाव से खरीदा था, लेकिन अब इस प्याज को कौडिय़ों के भाव में भी कोई नहीं पूछ रहा है। यहां एकत्रित 6500 टन में से आधे से ज्यादा प्याज सड़ चुका है। अगर सरकारी घाटा कम करने के लिए इस सड़े प्याज को बेचा भी जाता है तो इसका भाव 4 से 5 रुपये से ज्यादा का नहीं लग सकेगा। विदित हो कि किसानों से फसल खरीद कर नाफेड अपने गोडाउन में इसलिए रखती है, ताकि मार्केट में दाम बढऩे पर वह कम कीमत में फसल लोगों को मुहैया करा सके। पुणे, नासिक व अहमदनगर में के गोमादों में सड़ रहा प्याज बयां कर रहा पैसे की बर्बादी की कहानी। इस 6500 टन में से 1300 टन सरकार के बफर स्टॉक का प्याज है। जानकारों के अनुसार, प्याज के रख-रखाव की तकनीकि आधुनिक होनी चाहिए थी। बता दें कि नासिक के लासलगांव में बीएआरसी की एक यूनिट है, जिसमें प्याज को लंबे समय तक रखने के लिए रेडिएट किया जाता है और इसकी कीमत करीब 50 पैसे से एक रुपए प्रति किलो पड़ती है। नाफेड द्वारा खरीदे गए प्याज को इस प्रोसेस में नहीं लाया गया, जिससे प्याज जल्दी खराब हो रहा है।

सरकार का हुआ नुकसान…

सरकार ने तकरीबन 1100 रुपये क्विंटल के हिसाब से ये प्याज किसानों से खरीदा था, जिसके रखरखाव का खर्च है। वहीं बाजार में प्याज 8 से 10 रुपये किलो बिक रहा है। गौरतलब है कि नासिक के गोदाम में नाफेड के जरिए खरीदे गए प्याज को बाजार में बढ़ी कीमतों के दौरान सरकार के जरिए वितरित करने थे, लेकिन ऐसा नहीं किया गया और बड़ी मात्रा में प्याज सड़ गया। वहीं व्यापारियों की मानें तो नाफेड के रखरखाव में कई कमियां हैं, जिससे न तो व्यापारियों समेत उपभोक्ता और किसान में किसी को भी लाभ नहीं मिल सकता है। व्यापारी अब नाफेड के काम करने के तौर तरीके पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि इससे प्याज के कारोबार पर कोई असर नहीं पड़ेगा, लेकिन यह नुकसान सरकार का हुआ है।

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