महादेवी और निकोयो दोनों ही खींचती हैं समान चित्र, Japan से पधारीं किकुचि ने संगोष्ठी में की शिरकत…

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महादेवी और निकोयो दोनों ही खींचती हैं समान चित्र
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छायावादी कवियों के समक्ष हिंदी कविता को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करने की थी चुनौती : डॉ. करुणाशंकर

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. जापान से पधारीं डॉ. तोमोको किकुचि ने कहा कि महादेवी वर्मा और जापानी कवयित्री निकोयो न केवल समकालीन थीं, अपितु दोनों ही नारी जीवन का समान चित्र खींचती हैं। इस मौके पर प्रस्तावना प्रस्तुत करते हुए हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने कहा कि छायावादी कवियों के समक्ष हिंदी कविता को विश्व स्तर पर प्रतिष्ठित करने की चुनौती थी, जिसे उन्होंने बखूबी पूरा किया। यहां विज्ञान, धर्म, दर्शन और ज्ञान-विज्ञान के तमाम अनुशासन काव्य- संपत्ति बन जाते हैं। ये बड़ी चिंता के कवि है जो विश्वस्तरीयप्रश्न उठाते हैं। इस बहुस्तरीय , जटिल और बहुआयामी काव्य का सही मूल्यांकन होना अभी बाकी है। इस मौके पर अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए डॉ. सूर्यप्रसाद दीक्षित ने कहा कि छायावादी कवियों के प्रति आलोचकों का रवैया बहुत अच्छा नहीं रहा। आचार्य शुक्ल से लेकर अब तक के आलोचक भी उसके साथ न्याय नहींकर पाये हैं।मुंबई विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग ने अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन द्वारा एक ऐतिहासिक पहल की है। उद्घाटन सत्र में अध्यक्षीय वक्तव्य देते हुए पं.रविशंकर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. केशरीलाल वर्मा ने कहा कि छायावाद आधुनिक कविता का सबसे महत्वपूर्ण आंदोलन है, जिसके सौ वर्ष पूर्ण होने पर इतना बड़ा और इस स्तर का दूसरा आयोजन अभी तक नहीं हुआ। इस अवसर पर वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी राकेश मिश्र के तीन काव्य संकलनों के दूसरे संस्करण ‘चलते रहे रात भर’ ‘अटक गई नींद’तथा’ जिंदगी एक कण है’ का लोकार्पण भी सम्पन्न उपस्थित अतिथियों द्वारा सम्पन्न हुआ। प्रख्यात अभिनेता अखिलेंद्र मिश्र ने प्रसाद के राष्ट्रीय गीत ‘हिमाद्रि तुंग शृंग से प्रबुद्ध शुद्ध भारती’ का अत्यंत ओजस्वी पाठ करते हुए छायावादी कविता को शास्वत महत्व की कविता बताया। इस अवसर पर महाकवि जयशंकर प्रसाद के प्रपौत्र श्री विजयशंकर प्रसाद ने विज्ञान का जानकार होने के बावजूद आंसू तथा कामायनी के बीच एक अद्भुत अंतःसूत्र संकेतित किया।इस मौके पर प्रवासी संदेश अखबार के संपादक श्री अरुण उपाध्याय का सम्मान कुलपति केशरीलाल वर्मा के हाथों किया गया।इस सत्र का सूत्र संचालन संयोजक सुनील वल्वी ने किया और डॉ. सचिन गपाट आभार ज्ञापन किया।

देश भर के सैकड़कों विद्वान रहे उपस्थित…

समापन सत्र के दौरान मुंबई विश्वविद्यालय के कुलाधिपति नामित व्यवस्थापन परिषद सदस्य डॉ. दीपक मुकादम की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. श्वेता दीप्ति और वरिष्ठ आई.ए.एस. अधिकारी राकेश मिश्र ने संगोष्ठी में हुए गंभीर विचार-विमर्श को ऐतिहासिक महत्व का बताया। इस अवसर पर प्रख्यात चिंतक वीरेंद्र यागनिक, डॉ. रामसागर, डॉ. सुनील कुलकर्णी, जी. मीडिया के संपादक डॉ. संजय सिंह व डॉ. संजय प्रभाकर ने संगोष्ठी के माध्यम से छायावाद के पुनर्पाठ की दृष्टि से इस संगोष्ठी के महत्व पर प्रकाश डाला। इस सत्र का संचालन डॉ. सचिन गपाट ने किया। हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष डॉ. करुणाशंकर उपाध्याय ने छायावाद के पुनर्पाठ के प्रतिमान बतलाते हुए आभार ज्ञापन किया। इस संगोष्ठी में देश-विदेश से लगभग तीन सौ विद्वान, प्राध्यापक और शोधार्थी शामिल हुए।

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