मराठा आरक्षण फडणवीस सरकार पर दबाव, कहीं उच्च न्यायालय में न हो जाए भंग

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राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना समेत मराठी संगठनों ने भी किया इसका समर्थन
मराठा आरक्षण फडणवीस सरकार पर दबाव
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राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना समेत मराठी संगठनों ने भी किया इसका समर्थन

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के मराठा आरक्षण के फैसले को लेकर अगर 50 प्रतिशत ज्यादा आरक्षण दिया जाता है तो उच्च न्यायालय के नियमानुसार उसे भंग किया जा सकता है। इसीलिए राज्य की फडणवीस सरकार पर ओबीसी कोटे से ही उन्हें आरक्षण की सीमा तय करने का दबाव उच्च न्यायालय का है। आग में घी का काम करने वाली कांग्रेस पार्टी ने कहा कि न्यायालय के नियम भंग न हों, इसलिए घटनात्मक तरीके से आरक्षण दिए जाएं। राष्ट्रवादी कांग्रेस, शिवसेना समेत मराठी संगठनों ने भी इसका समर्थन किया है। यह आरक्षण कैसे और कितना दिया जाए इसका हिसाब-किताब मंत्रिमंडल की उपसमिति ही करेगी।

गठित समिति पर पक्षपात का आरोप…

वहीं मराठा समाज के जुझारू सदस्य और आरक्षण विशेषज्ञ प्रोफेसर डॉक्टर बालासाहेब सराटे की माने तो ओबीसी के आरक्षण को हाथ न लगाते हुए मराठा समाज के लिए अलग एक स्वतंत्र वर्ग बनाकर 50 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सकता है, लेकिन इसे कोर्ट में इस तरह से पेश करना होगा कि अदालत में 50 प्रतिशत की मर्यादा बरकरार रह सके। आयोग के विचार- विमर्श के फैसले को एक मत बताकर पक्षपात का आरोप लगाते हुए सराटे ने कहा कि गठित की गई समिति में उपस्थित 8 सदस्यों में से 7 सदस्य तो ओबीसी के थे और समिति में मराठा समाज के सिर्फ एक ही सदस्य को शामिल किया गया था।

3 करोड़ में सिर्फ 42 हजार का सर्वे…

राज्य सरकार खोखले घोषणा न करें मराठाओं को उच्च न्यायालय में टिका रहने वाला आरक्षण चाहिए। मराठा व ओबीसी वर्ग में वाद-विवाद की परिस्थिति उत्पन्न न हो। इसलिए पिछड़े वर्ग आयोग ने जो भूमिका ओबीसी के समय निभाई थी, उन्होंने बगैर किसी रोक-टोक के आरक्षण पारित किया था। ऐसा राज्य घटना का उदाहरण लेते हुए सरकार को मराठा समाज के लिए भी निर्णय लेने के लिए भी तत्पर होना होगा। वहीं यह भी उजागर हुआ है कि महाराष्ट्र में जनगणना के अनुसार, 30 प्रतिशत यानी तीन करोड़ जनसंख्या के आंकड़े में से सिर्फ 42 हजार परिवार का ही सर्वे किया गया, जिसकी वजह से उन जातियों की जमीनी सच्चाई सामने नहीं आ सकी।

अगर सम्पन्न हैं तो कुछ क्षेत्रों में ही आरक्षण…

वहीं महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने कहा है कि मराठा समाज शैक्षणिक और सामाजिक दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। आयोग ने इस निष्कर्ष को मान कर उतनी ही मर्यादा में रहकर उन्हें आरक्षण दिया है। वास्तविक तौर पर देखा जाए तो कोई भी समाज या जाति में अगर पिछड़ी जाति शामिल होती है और अगर वो राजनैतिक दृष्टि से संपन्न यानी उनका सदस्य जिला ग्राम पंचायत, नगर सेवक है तो उस पिछड़ी जाति को केवल शिक्षा और सामाजिक दृष्टि से कुछ क्षेत्रों में ही आरक्षण दिया जाना चाहिए।

तमिलनाडु के लें उदाहरण…

तमिलनाडु में हुए सर्वे रिपोर्ट की मानें तो वहां पर उच्च न्यायालय की मर्यादित सीमा को लांघते हुए 50 प्रतिशत आरक्षण लागू किया है, क्योंकि उनका सर्वे राज्य के प्रत्येक घर में किया गया था। वहां भी अब 50 प्रतिशत आरक्षण पर उंगली उठने लगी है। इसलिए अब विधि, न्याय विभाग, महाधिवक्ता तमिलनाडु सरकार के इस फैसले को न्यायालय में घसीटने का मन बना रहे हैं।
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