प्रकाश आंबेडकर ने खेला अकोला पैटर्न का दांव, ओवेसी की प्रचार सभा कर दी गई रद्…

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अटकलें कितनी सटीक होंगी, यह तो चुनाव परिणामों के बात ही पता चल पाएगा
प्रकाश आंबेडकर ने खेला अकोला पैटर्न का दांव,
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अटकलें कितनी सटीक होंगी, यह तो चुनाव परिणामों के बात ही पता चल पाएगा

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वंचित बहुजन आघाड़ी के प्रमुख प्रकाश आंबेडकर ने सोशल इंजीनियरिंग के माध्यम से अकोला पैटर्न बनाकर एक नया राजनीतिक दांव खेलने का प्रयत्न किया है। आगामी चुनाव में आंबेडकर ने एमआईएम के साथ दोस्ती का एक नया अध्याय शुरू किया है। ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि इस दोस्ती से आंबेडकर के बहुजन समाज के कई घटक आंबेडकर समुदाय से अलग हो जाएंगे। हालांकि यह अटकलें कितनी सटीक होंगी, यह तो चुनाव परिणामों के बात ही पता चल पाएगा। वहीं दूसरी ओर भले ही ओवेसी राज्य भर में प्रचार कर रहे हों, लेकिन वे आंबेडकर की राजनीतिक राजधानी अकोला में प्रचार करने नहीं गए। 10 अप्रैल को उनकी प्रस्तावित सभा को रद्द कर दिया गया था।

मुस्लिम वोटों पर बना MIM से गठबंधन…

वहीं यह भी माना जा रहा है कि प्रकाश आंबेडकर के ओबीसी के छोटे घटक दलों को एक साथ लाने से दलित वोटों का विस्तार जरूर हुआ है। इन कारकों में दलित वोटों का प्रतिशत सबसे बड़ा है। वहीं उन्होंने मुस्लिम वोटों में इजाफा करने के लिए अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम के सांसद असदुद्दीन ओवेसी को भी साथ लिया। इस मित्रता के चलते राकांपा के वोट बैंक को ठेस पहुंचेगी। दोनों पक्षों ने आंबेडकर के नेतृत्व में सवाल उठाए। नेतृत्व सही न होने के चलते महाराष्ट्र में वंचित के रूप में तीसरा विकल्प लोस चुनाव के ऐन मौके से पहले मैदान में आ गया। इसके चलते अखिल भारतीय मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिम व एमआईएम का गठबंधन मुस्लिम वोटों पर बना है

मुस्लिम समुदायों में जोर-शोर से हो रही चर्चा…

हालांकि संगठन पर रूढ़ीवादी आरोप भी लगे, लेकिन ओवेसी को मुस्लिम समुदाय तक एमआईएम के विचारों पहुंचाने के लिए ओवेसी को श्रेय मिल रहा है। अपनी अलग विचारधारा से ओवैसी कांग्रेस और भाजपा की आलोचनाओं का सामना करते आए हैं, जिसका लाभ उठाने के लिए आंबेडकर हर स्थिति में तैयार हैं। वहीं लोगों के बीच ओवेसी के भाषण का काफी प्रभाव देखा जा रहा है। ओवेसी को अपनी सोच का विस्तार करने के लिए एक बड़ा मंच मिला है, जिससे मुस्लिम समुदायों में इसकी चर्चा जोर-शोर से हो रही है और इसका लाभ आगामी चुनावों में देखने को मिलेगा। विदित हो कि कांग्रेस ने राज्य भर में केवल अकोला में ही मुस्लिम उम्मीदवार दिया है। इसलिए मुस्लिम समुदाय में चर्चा है कि ओवेसी की सभा को जानबूझकर अकोला में रद्द किया गया। इससे साफ जाहिर है कि समाज तक पहुंचने वाले उनके हक के लिए ओवेसी का प्रयत्न खाली गया और इससे मुस्लिम समुदायों में काफी रोष का माहौल है।

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