श्रीहंस विजय नगर आश्रम का ध्यान शिविर का आयोजन 

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परमात्मा प्राप्ति के लिए तन्मयता जरूरी है : मुसाफिरानंद 
श्रीहंस विजय नगर आश्रम का ध्यान शिविर का आयोजन 
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परमात्मा प्राप्ति के लिए तन्मयता जरूरी है : मुसाफिरानंद

– NDI24 नेटवर्क
वसई. वसई पूर्व अंतर्गत स्थित मानव उत्थान सेवा समिति श्री हंस विजय नगर आश्रम एवरसाइन में ध्यान शिविर का आयोजन किया गया| इस अवसर पर उपस्थित लोगों को मुसाफिरानंद द्वारा ध्यान और तन्मयता पर प्रकाश डाला गया| उन्होंने कहा कि परमात्मा प्राप्ति के लिए तन्मयता (लग्न व दृढ़ इच्छा शक्ति) होना जरुरी बताया गया|
ज्ञात हो कि वसई पूर्व स्थित एवरशाईन में मानव उत्थान सेवा समिती की ओर से श्रीहंस विजय नगर आश्रम की ओर से समय-समय पर आध्यात्म और योग के माध्यम से समाज को समृद्ध और सुखमय बनाने जनजागृती अभियान चलाया जाता आ रहा है| जरूरतमंद छात्रों को लेकर सतपाल महाराज के मार्गदर्शन में आश्रम के प्रमुख मुसाफिरानंद नेतृत्व में गठित कमेटी द्वारा सराहनीय कदम उठाया गया| आश्रम में ध्यान योग शिविर के माध्यम से महात्मा मुसाफिरनंद जी ने कहा मन की तन्मयता बहुत जरूरी है । ध्यान के वक्त मन इधर-उधर भटकता है| चंचल मन को प्रभु के पावन नाम में स्थिर कर किसी अन्य का चिंतन न करें । जैसे तीरंदाज जब तीर चलाता है तब उसका मन सिर्फ लक्ष्य होता है, जिसके कारण वह लक्ष्य का भेदन करता है|  वैसे ही हमारा मन अपने इष्ट देव के प्रति संपूर्ण समर्पित होने पर ही ईश्वर का दर्शन कर सकता है । ध्यान के समय हमारा मन ध्यान में होना चाहिए|  मन में किसी तरह का लोभ नहीं होना चाहिए| उन्होंने बताया की एक बुढ़िया ने गुरु नानक देव जी को अपने घर में बुलाया और एक भरी गिलास में दूध दिया, दूध के साथ जब मलाई गिलास में आ गई तो कहने लगी अरे-अरे, तब गुरु नानक देव जी ने दूध नहीं पिया । बुढ़िया माँ ने कहा महाराज पीजिए, नानकदेव जी ने कहा इसमें तूने अरे-अरे डाल दिया है । मतलब उसका था बुढ़िया का मन दूध में मलाई नहीं देना था, बुढ़िया का मलाई से मोह था । अतः हमें अपने जीवन में किसी तरह का लोभ-लालच नहीं आने देना चाहिए| तभी हमारी भक्ति सफल होगी।
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