राज्य में फिर 2 नवंबर से एकजुट होंगे मराठा, आरक्षण की रिपोर्ट तय करेगी BJP राजनीति का भविष्य…

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राज्य में फिर 2 नवंबर से एकजुट होंगे मराठा
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मराठा क्रांति महामोर्चा को राज्य की फडनवीस सरकार पर भरोसा नहीं

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. देश भर में जहां सभी राज्यों ने आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है, वहीं महाराष्ट्र में मराठा आरक्षण की रिपोर्ट बीजेपी की राजनीति का भविष्य तय करेगी। यहां मराठा आरक्षण और धनगर समाज के लिए आरक्षण का मुद्दा फिर उठने लगा है। विदित हो मराठा समुदाय 15 नवंबर, 2018 को राज्य सरकार को आरक्षण के संबंध में रिपोर्ट जमा करेगा और रिपोर्ट की सिफारिशों पर बीजेपी के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेगा। मराठा आरक्षण को लेकर आज मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम में मराठा क्रांति मोर्चा के नेताओं नेताओं ने उक्त बातें कहीं। साथ ही एक बार फिर 2 नवंबर को मुंबई के आजाद मैदान में समुदाय के लोगों से एकत्रित होने की अपील की।

स्थानीय स्तर पर हुआ था आंदोलन…

मराठा क्रांति महामोर्चा के संभाजी पाटिल ने कहा कि मराठा समुदाय के लिए आरक्षण पाने को लेकर स्थानीय स्तर पर आंदोलन आयोजित किया गया था। इस संबंध में सरकार मराठा समुदाय पर आरक्षण के लिए बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका को हटाने के लिए दबाव डाल रही है। राज्य सरकार ने जहां एक तरफ याचिका में तेजी लाने के लिए बात कही थी, वहीं मराठा समुदाय का असंतोष कम करने के लिए भी योजनाओं की घोषणा की थी। इनमें से कई घोषणाएं आज भी सिर्फ पेपर पर ही हैं और इसका कार्यान्वयन अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है। सरकार की इस कार्यशैली ने बीजेपी की फडनवीस के खिलाफ मराठा समुदाय में नया आक्रोश पैदा कर दिया है।

करीब 30 से 40 प्रतिशत सीटें मराठा समुदाय की…

वहीं मराठा क्रांति महामोर्चा के विपुल माने बताते हैं कि राज्य भर में बीजेपी टिकट पर 122 विधायक और 18 सांसद हैं, जिनमें करीब 30 से 40 प्रतिशत सीटें मराठा समुदाय से संबंधित हैं। शेष विधायक व सांसद ओबीसी, दलित और जनजातीय समुदायों से हैं। वहीं लगभग सभी समुदाय नागरिकों ने मराठा आरक्षण की मांग का समर्थन किया है। राज्य की बीजेपी सरकार मराठा समुदाय को मूर्ख बनाने की भी कोशिश कर रही है। लेकिन सरकार द्वारा गठित की गई समिति की रिपोर्ट में आरक्षण पर निर्णय आगामी चुनाव में बीजेपी सरकार को प्रभावित करेगा। वहीं राज्य सरकार ने मराठा आरक्षण को लेकर अपने अनुसार, प्रत्यक्ष वित्तीय सहायता की जो सिफारिश की थी, उस पर भी अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जा सका है।

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