महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल को बड़ी राहत, रद्द की गई MIDC की जमीन पर आयकर वसूली…

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आयकर न्यायाधिकरण का महत्वपूर्ण फैसला
महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल को बड़ी राहत
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आयकर न्यायाधिकरण का महत्वपूर्ण फैसला

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. महाराष्ट्र औद्योगिक महामंडल द्वारा अधिग्रहीत की गयी जमीन पर आयकर विभाग कर वसूल नहीं कर सकता, ऐसा महत्वपूर्ण फैसला आयकर (अपीलीय) न्यायाधिकरण ने दिया है। इस फैसले से एमआयडीसी को बहुत बड़ी राहत मिली है। आयकर विभाग द्वारा महामंडल से वसूल किये गये 395 करोड़ रुपये 12 फीसदी ब्याज समेत वापस करने होंगे। इसी के साथ पिछले दस वर्ष की 9  हजार करोड़ की वसूली भी रद्द होगी। इस फैसले का फायदा महाराष्ट्र सरकार के सिडको, म्हाडा, एमएमआरडीए तथा अन्य मंडलों को होगा । अन्य राज्यों को भी इस फैसले से लाभ होगा।  इस न्यायालयीन प्रक्रिया के समय महामंडल के अध्यक्ष और उद्योगमंत्री सुभाष देसाई ने समय-समय पर   मार्ग दर्शन किया ।

शुरू की गई थी वसूली…

आयकर विभाग द्वारा सन् 2006 से 2016 तक महाराष्ट्र औद्योगिक विकास महामंडल द्वारा वितरित हुई जमीन भाडेपट्टी से मिलने वाली रकम पर कर वसूली शुरू की गयी थी। दस वर्ष की यह  रकम 9 हजार करोड़ रुपये थी। वसूली के लिए आयकर विभाग द्वारा महामंडल के बैंक खाते सील कर 395 करोड़ रुपये सख्ती के साथ वसूल किये गये थे। इसके विरोध में महामंडल को सर्वोच्च न्यायालय में स्थगन मिल गया था। यह प्रकरण आयकर आयुक्त के पास पुन: सुनवाई के लिए भेजा गया था, लेकिन आयकर आयुक्त ने यह  प्रकरण वापस कर दिया था। इसके बाद एमआयडीसी द्वारा आयकर आयुक्त के आदेश के विरुद्ध आयकर विभाग के अपीलीय न्यायाधिकरण में मदद मांगी थी। जी. एस. पन्नु व रवीश सूद की पीठ द्वारा इस प्रकरण की सुनवाई एक सप्ताह तक चली। सुनवाई के दौरान महामंडल की स्थापना से लेकर अनेक कागजात तथा अधिनियम की दुरुस्ती और दुरुस्ती के दस्तावेज जमा किये गये। कागज पत्रों की जांच के बाद न्यायालय द्वारा आयकर विभाग द्वारा एमआयडीसी के द्वारा संपादित की गई। जमीन की भाडेपट्टी पर आयकर नहीं लगाया जा सकता, ऐसा महत्वपूर्ण फैसला दिया ।

मुख्य लेखा अधिकारी ने दी जानकारी…

महामंडल के लिए संपादित की गई जमीन का महामंडल को केवल कब्जा मिलता है, लेकिन परंतु जमीन पर मालिकाना हक राज्य सरकार का रहता है। महामंडल के कार्य सरकार के प्रतिनिधि के रूप में होने से इस कार्य का स्वरूप व्यावसायिक अथवा लाभ कमाना नहीं है। इसलिए महामंडल के पास आने वाली रकम कर निर्धारण के लिए योग्य नहीं है, ऐसा फैसला न्यायालय ने दिया। न्यायालय का यह आदेश महामंडल की सभी अपीलों के लिए लागू होता है, आयकर विभाग की 9311 करोड़ रुपयों की वसूली अब देय नहीं है। इसी प्रकार महामंडल से वसूल की गई  395 करोड़ की रकम 12 फीसदी ब्याज के साथ वापस करने के आदेश न्यायालय द्वारा दिये गये हैं। महामंडल की ओर से लक्ष्मीकुमारन एंड व्ही. श्रीधरन इस नामांकित विधीफर्म के वरिष्ठ कानून विशेषज्ञ व्ही. श्रीधरन ने पक्ष रखा। व्ही. श्रीधरन को न्यायालयीन प्रक्रिया करणे के लिए जरूरी जानकारी महामंडळ की विधि विभाग प्रमुख स्मिता चावरे तथा मुख्य लेखा अधिकारी रवींद्र सावंत ने दी।
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