अक्षय ऊर्जा में दूसरे से तीसरे स्थान पर जा पहुंचा महाराष्ट्र, राज्य में अब निर्मित हो रही 5,172 मेगावाट बिजली…

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संभावित क्षमता 74 हजार 500 मेगावाट बिजली के उत्पादन से कोसों दूर है महाराष्ट्र, शहरी ठोस कचरे से बिजली बनाने में दिलचस्पी
अक्षय ऊर्जा में दूसरे से तीसरे स्थान पर जा पहुंचा महाराष्ट्र
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संभावित क्षमता 74 हजार 500 मेगावाट बिजली के उत्पादन से कोसों दूर है महाराष्ट्र, शहरी ठोस कचरे से बिजली बनाने में दिलचस्पी

– NDI24 नेटवर्क टीम

मुंबई. महाराष्ट्र को पारंपरिक कृत्रिम तरीके से ऊर्जा निर्मित के क्षेत्र में तीसरा स्थान मिला है। वहीं राज्य में 9,300 मेगावाट बिजली उत्पन्न करने की क्षमता में कमी आई है। पिछले 5 वर्षों का अगर रिकॉर्ड देखा जाए तो अक्षय ऊर्जा निर्माण में 5,172 मेगावाट के क्षमता को बढ़ाते हुए कम से कम 2 गुना ऊर्जा निर्माण का रिकॉर्ड तोड़ा है। अक्षय ऊर्जा निर्माण में पूरे देश में कर्नाटक, तमिलनाडु के बाद महाराष्ट्र का नंबर आता है। इससे पहले की गई गणना के अनुसार, महाराष्ट्र दूसरे स्थान पर था। राज्य की अक्षय ऊर्जा उत्पादन की संभावित क्षमता 72 हजार 500 मेगावाट है। अत: इस भारी अंतर को दूर करने के लिए अभी कई सारे प्रकल्पों का होना बाकी है। 

सिर्फ 37 मेगावाट योजना से चल रहा काम : बिजली आयोग…

पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा, लघु पनबिजली और शहर के डंपिंग से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा के स्त्रोत से काफी हद तक सफलता हासिल की है। अकृत्रिम स्त्रोत का उपयोग ज्यादा से ज्यादा करने पर लघु पनबिजली की ओर लापरवाही बरती जा रही है। इन स्त्रोतों से लघु बिजली कम से कम 794 मेगावाट उत्पन्न कर सकती है, लेकिन पर्याप्त मांग में लगने वाली योजना से सिर्फ 375 मेगावाट बिजली उत्पन्न की जा रही है वैसे ही घनकचरा डंपिंग से कम से कम 287 मेगावाट बिजली उत्पन्न की जा सकती है, लेकिन अभी तक इसमें सिर्फ 37 मेगावाट के योजना से ही काम चल रहा है। यह जानकारी महाराष्ट्र बिजली आयोग की तरफ  से दी गई है।

15 हजार करोड़ की आर्थिक आवश्यकता…

भारत की नई तकनीक से ऊर्जा निर्माण के संभावित आंकड़ा 8 लाख 96 हजार 602 मेगावाट है। सन 2004 में राज्य में सिर्फ 748 मेगावाट ही बिजली निर्माण होती थी, मतलब बिजली में पवन ऊर्जा से 40 जगह तक इसकी पहुंच थी। इससे कम से कम 5 हजार 961 मेगावाट बिजली निर्माण की क्षमता है। अभी तक राज्यों में विभिन्न स्थानों पर 4 हजार 788 मेगावाट वाले क्षमता के 23 प्रकार बनाए गए हैं। निजी विश्लेषकों ने लगभग 15 हजार करोड़ रुपए का निवेश किया है, लेकिन आज भी इतने ही आर्थिक रुपयों की आवश्यकता है। चीनी कारखानों में गन्ने की सिंचाई के बाद उपलब्ध करने से बिजली का निर्माण किया जाता है। इससे उपलब्ध बिजली की क्षमता 1250 मेगावाट है, लेकिन अब तक इसने 1953 मेगावाट तक क्षमता की परियोजना को साकार किया है।

पिछड़े पायदान पर सौर ऊर्जा प्रकल्प…

महाराष्ट्र में सौर ऊर्जा के स्त्रोत का उपयोग ठीक से कारगर न हो पाने पर यह योजना पिछड़ती ही जा रही है। भविष्य में बड़े पैमाने पर सौर ऊर्जा उपलब्ध हो सकती है। सौर फोटो वोल्टिक और सौर तापीय प्रौद्योगिकी के आधार पर बिजली का उत्पादन किया जा सकता है। अब तक 1607 मेगावाट बिजली उत्पादन परियोजना ग्रिड से जुड़कर सौर ऊर्जा के माध्यम से शुरू की गई है। वहीं राज्य में सौर ऊर्जा की संभावित क्षमता 64 हजार 320 मेगावाट बताई गई है।

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