दक्षिण मुंबई में फिर आमने-सामने होंगे मिलिंद देवड़ा और अरविंद सावंत, गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के लोगों का वर्चस्व अधिक…

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अधिकांश नागरिकों ने बसाए घर, लोस चुनाव क्षेत्र में बदल गए समीकरण
दक्षिण मुंबई में फिर आमने-सामने होंगे मिलिंद देवड़ा और अरविंद सावंत, गुजरात
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अधिकांश नागरिकों ने बसाए घर, लोस चुनाव क्षेत्र में बदल गए समीकरण

– NDI24 नेटवर्क टीम

मुंबई. कोलाबा, नरीमन प्वाइंट से सीधे वर्ली सी लिंक तक फैले हुए दक्षिण मुंबई में शिवसेना के विधायक अरविंद सावंत और राहुल गांधी के करीबी मिलिंद देवड़ा में फिर से भिड़ंत होने वाली है। भाजपा से युति होने के बाद शिवसेना उम्मीदवार की पिछले पराभव को उखाड़ फेंकने का प्रयत्न करने, मराठी, गुजराती-मारवाड़ी, जैन मतदाताओं पर शिवसेना की पकड़ होते हुए भी इस बार आह्वान सरल होता नजर नहीं आ रहा है। दक्षिण मुंबई पहले एक असली मराठी परिसर था। कुछ मध्यमवर्गीय और मिल मजदूरों की बस्तियां थीं, पिछले कई वर्षों में विविध कारणों से मराठी परिवारों ने पश्चिम और पूर्व उप नगरों की राह पकड़ ली और धीरे-धीरे मराठी लोग इस जगह से कम होते गए। गुजरात, राजस्थान और अन्य राज्यों के लोग नागरिक व्यवस्था की खोज में मुंबई का रुख किया और इसमें से अधिकांश नागरिकों ने दक्षिण मुंबई में अपने घर बसा लिए हैं। इसलिए इस इलाके में समीकरण बदल गए हैं।

कम हुए मराठी मानूस…

बाकी लोगों की बढ़ती संख्या, शिवसैनिकों में अंतर युद्ध के कारण इस जगह पर शिव सैनिक की पकड़ कम हो रही है। कोलाबा से ताड़देव के बीच चीरा बाजार, गिरगांव, कुभारवाड़ा, खेतवाड़ी, ग्रांट रोड, ताड़देव आदि अधिकतर शिवसेना की पकड़ वाली जगह थीं, मगर धीरे-धीरे यहां भी पकड़ ढीली हो गई है। दक्षिण मुंबई में अपने कुछ किले अभेद होने का शिवसेना की समझ 2 महीने पहले महापालिका चुनाव में दूर हो गई। पिछले विधानसभा चुनाव में शिवसेना और भाजपा युति खत्म होने आई थी और उसका परिणाम बीएमसी चुनाव में देखने को मिला।

शिवसेना के नगर सेवक ज्यादा…

कोलाबा से शिरडी तक 36 नगरसेवक, इसमें से भाजपा के 10 शिवसेना के 18, कांग्रेस के 6, अखिल भारतीय सेना का एक और समाजवादी पार्टी का एक। इनमें शिवसेना के नगरसेवक ज्यादा है, लेकिन इस चुनाव क्षेत्र में मराठी प्रतिशत एक चिंता की बात है। इसलिए युति का यह संघ भाजपा को मिले, यह मांग भाजपा की थी। मराठी, गुजराती, मारवाड़ी जैसे लोगों के समीकरण जुडऩे पर विजय मिलना निश्चित है।

जनता देगी जवाब…

लोकसभा के पिछले चुनाव में परिस्थिति निकाली थी, अब परिस्थिति बदल गई है। शिवसेना भाजपा की युति हो गई है। पिछले 5 सालों का लेखा-जोखा का जवाब जनता देगी।

– अरविंद सावंत, सांसद, शिवसेना

घर बैठाने का आ गया टाइम…

पिछले 5 वर्षों में जनता की खूब दुर्गति हुई है। शिवसेना-भाजपा ने सत्ता को उपभोग किया है। शिवसेना ने तो सिर्फ मोदी सरकार पर टिप्पणी ही किया। मराठी जनता को फंसाया गया। अब इस सरकार को घर बैठने का टाइम आ गया है।

– मिलिंद देवड़ा, कांग्रेसी नेता

विधानसभा क्षेत्र…

  • वरली – शिवसेना
  • शिवडी – शिवसेना
  • भायखला – एमआईएम
  • मलबार हिल – भाजपा
  • मुंबादेवी – कांग्रेस
  • कोलाबा – भाजपा

2019 में मतदाता…
कुल मतदाता – 1531446

वोटर है जागरूक…

  • पुरुष – 842889
  • महिला – 688537
  • अन्‍य – 20
  • 2014 के चुनाव पर एक नजर…
  • उम्मीदवार     पार्टी     वोट
  • अरविंद सावंत शिवसेना 374609
  • मिलिंद देवड़ा कांग्रेस 246045
  • बाला नांदगावकर मनसे 84773
  • मिरा संन्याल आप 40298
  • प्रकाश रेड्डी  सीपीआई 6897
  • कुल मतदाता – 148584
  • मतदान – 779859 (52.49 प्रतिशत)

आज का वोटर जागरूक है। वह सुनता और देखता तो सबकी है, लेकिन मतदान करते समय वह विकास को ही महत्व देता है। यहां की सकरी सड़के और रोजगार को लेकर इस बार लोग वोटिंग करने को तैयार हैं। यहां गुजराती, मारवाड़ी समेत अन्य भाषी लोगों का भी वर्चस्व बढ़ गया है, इसके चलते जीत अभी से तय नहीं की जा सकती।


– विक्रम जैन, मुंबा देवी

आम आदमी पर फर्क नहीं पड़ता…

आगामी चुनाव में कांग्रेस और शिवसेना के बीच गजब की भिड़ंत दिखने वाली है। वैसे ही चुनाव को कोई भी जीते या हारे किसी आम आदमी को कोई फर्क नहीं पड़ता। प्रत्याशी चुनाव के समय तो नजर आते हैं, लेकिन जीतने के बाद वे अपने क्षेत्र की ओर ज्यादा ध्यान भी नहीं देते। इस बाद जो क्षेत्र के लिए काम करेगा, वोट उसी को दिया जाएगा।


– सुधीर यादव, ओपेरा हाउस

लोस क्षेत्र रहा है कांग्रेस का गढ़…

2014 की अगर बात छोड़ दी जाए तो दक्षिण मुंबई हमेशा से ही कांग्रेस का गढ़ रहा है। कांग्रेस ने इस क्षेत्र की ओर ध्यान भी दिया था, लेकिन इस चुनाव में शिवसेना और कांग्रेस के बीच सीधी टक्कर होती नजर आ रही है। मतदाता ने क्षेत्र के विकास के लिए वोट देने की ठानी है, जबकि प्रचार के दौरान हर प्रत्याशी बड़ी-बड़ी घोषणाओं के पुल बांध रहे हैं।


– गौरवपंत मिश्रा, खेतवाड़ी

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