अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा होने के बावजूद उपलब्ण नहीं हैं डॉक्टर्स, मरीजों को नायर हॉस्पिटल के लगाने पड़ रहे चक्कर…

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2016 में नगर निगम से नियुक्‍त किए 45 डॉक्टर, उपनगरीय अस्पतालों में कार्यरत हैं करीब दस चिकित्सक
अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा होने के बावजूद उपलब्ण नहीं हैं डॉक्टर्स
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2016 में नगर निगम से नियुक्‍त किए 45 डॉक्टर, उपनगरीय अस्पतालों में कार्यरत हैं करीब दस चिकित्सक

– NDI24 नेटवर्क

मुंबई. बीएमसी के उपनगरी अस्पतालों और दवाखानों को गति देने के लिए सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च करके भी मरीजों को कोई लाभ नहीं हो पा रहा है। इसमें कार्यरत डॉक्टरों के पास उपचार के साधन न होने के चलते लोगों को मुंबई सेंट्रल के नायर अस्पताल के ही चक्कर काटने पड़ रहे हैं। उपनगरीय अस्पतालों और दवाखानों में दंत उपचार सुविधा शुरू करने के लिए नगर पालिका ने 2016 में 45 दंत चिकित्सकों को आधे समय के लिए नियुक्‍त किया था, जिसमें से 10 अस्पतालों में और बाकी पालिका के दवाखानों में कार्यरत हैं। घाटकोपर और बांद्रा को छोड़ दिया जाए तो किसी भी जगह पर मूलभूत सुविधा तक उपलब्ध नहीं हो रही है, जिसकी वजह से डॉक्टरों के पास दांत साफ करना जांच और दांत निकालना ही काम रह गया है।

डॉक्टरों ने 2018 में की थी शिकायत…

दिन में करीब 30 लोग उपचार के लिए आते हैं। इस पर डॉक्टरों का कहना है कि इनमें से बहुत से दातों की वजह से आते हैं, लेकिन सुविधाएं न होने के चलते उन्हें नायर में जाना पड़ता है। कुछ अस्पतालों में 8-12 बजे के बीच डॉक्टर उपलब्ध ही नहीं होते तो मरीज क्या करेगा। अस्पतालों ने नगरपालिका से गुहार लगाई है कि डॉक्टरों को आधे दिन के लिए नहीं, बल्कि पूरे समय के लिए नियुक्त किया जाए। इस पर डॉक्टरों की मानें तो मरीजों को नायर में भेजते हैं तो वे हम पर चिल्‍लाते हैं । अब अगर सुविधाएं नहीं हैं तो क्या करें। हमें तो सिर्फ 15 हजार रुपये ही मिलते हैं। प्रयोगात्मक तौर पर पालिका ने तीन दवाखानों में नायर से सामग्री लाकर काम पूरा करने का काम जून 2018 में मंजूर हुआ था। उपयोग के लिए फीलिंग उपकरण पालिका ने नहीं दिया तो काम कैसे होगा। ऐसा डॉक्टरों का कहना है कि इस पर डॉक्टरों ने नवंबर 2018 में शिकायत भी की थी।

आयोग के पास जल्द भेजा जाएगा प्रस्ताव…

सामग्री होने पर भी काम न करने का आरोप पालिका ने एक दवाखाने पर लगाया और इसके जांच के लिए आदेश भी दिए हैं। पालिका उपनगरीय अस्पतालों के प्रमुख डॉक्टर शशिकांत के अनुसार, अस्पतालों में दंत उपचार की आवश्यकता पर विचार करके ही यह काम उठाया गया है। सुविधाओं में सुधार और पूरे समय डॉक्टरों की उपलब्धता के लिए प्रस्ताव आयोग के पास जल्दी भेजा जाएगा। 2018 में नए अस्पताल ने उप नगरीय अस्पताल और दवाखानों में दंत सेवा की जांच करके पालिका को वृतांत प्रस्तुत किया था। अस्पतालों में सिर्फ छोटे-मोटे ही काम किए जाते हैं, क्योंकि साधन नहीं हैं। साधनों की सफाई भी डॉक्टर ही करते हैं। उपलब्ध साधन रखने के लिए ही जगह नहीं है। इसलिए साधन उपलब्ध किया जाए, तब जाकर 60-70 प्रतिशत दंत उपचार दिया जा सकता है। ऐसा वृत्तांत में लिखा गया है।

बढ़ती संख्या के चलते नहीं हो सका काम

दवाखानों में मूलभूत सुविधा मिलना अपेक्षित है। प्रयोग के तौर पर हमने अस्पतालों से सामग्री मंगाकर काम शुरू भी किया, लेकिन रोगियों की संख्या बढ़ने से पूरा नहीं हो पाया। इसलिए सामग्री नहीं है, यह कहना गलत है।

– डॉ. पद्मजा केसकर, कार्यकारी अधिकारी, आरोग्य 
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