कांग्रेस-राकांपा गठबंधन में घर के ही हैं अधिकतर उम्मीदवार, वरिष्ठ नेताओं के परिवारीजनों पर पार्टी ने जताया भरोसा…

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कांग्रेस-राकांपा गठबंधन में घर के ही हैं अधिकतर उम्मीदवार
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महाराष्ट्र के लोकसभा चुनाव 2019 में खुलकर नजर आ रहा वंशवाद, बेटा-बेटी को बढ़ाने में जुटे पार्टी राजनीतिज्ञ

– NDI24 नेटवर्क 

मुंबई. आम लोग यदि किसी पार्टी की टिकट पाने की हसरत रखते हैं, लेकिन उनके सपने शायद ही पूरे हो पाते हैं। लोकसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस और राकांपा की घोषित सूची में बड़े नेताओं के बेटी-बेटियों यानी वशंवाद का बोलबाला सा नजर आ रहा है। राकांपा की तरफ से पार्टी सुप्रीमो शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले बारामती और पोते पार्थ पवार को मावल से उम्मीदवार बनाया गया है। कांग्रेस के हाल भी कुछ ऐसे ही हैं। पार्टी ने जाने-पहचाने चेहरों और दिग्गज नेताओं के बेटे-बेटियों को टिकट थमाया है। दक्षिण मुंबई से मिलिंद देवड़ा को टिकट दिया गया है, जो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, पूर्व केंद्रीय मंत्री और लंबे समय तक मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष रहे मुरली देवड़ा के बेटे है। उत्तर मध्य मुंबई से प्रिया दत्त को प्रत्याशी बनाया गया है, वे वरिष्ठ फिल्म अभिनेता और उत्तर पश्चिम मुंबई लोकसभा सीट से लंबे समय तक सांसद रहे सुनील दत्त की बेटी है। इसी तरह कांग्रेस की बात की जाए तो कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व मंत्री प्रभाराव की बेटी हैं चारुलता टोकस, जिन्हें कांग्रेस ने वर्धा लोकसभा सीट से उम्मीदवारी दी है।

पारिवारिक राजनीति को आगे बढ़ाने का श्रेय…

वहीं राकांपा के वरिष्ठ नेता भीमराव महाडिक के बेटे धनंजय महाडिक को भी इस बार कोल्हापुर से चुनाव मैदान में उतारा गया है। दीना पाटील के बेटे संजय दीना पाटील पर इस बार राकांपा ने फिर से भरोसा दिखाया है, जबकि वे पिछली बार हार गए थे, लेकिन 2009 के लोस चुनाव में उन्होंने जीत का चोला पहना था। वहीं शिवसेना के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद स्व. प्रकाश परांजपे थे, उसी दौरान उन्होंने बेटे आनंद परांजपे को राजनीति का चस्का लगा दिया था, लेकिन आनंद परांजपे ने राकांपा ज्वाइन कर ली और उन्हें ठाणे लोस क्षेत्र का उम्मीदवार बनाया गया है। साथ ही पूर्व राकांपा विधायक बलराम पाटल के सुपुत्र बाबाजी बलराम पाटील को कल्‍याण लोस क्षेत्र से मैदान में उतारा गया है। वरिष्ठ राकांपा नेता व पूर्व उप मुख्यमंत्री छगन भुजबल के बेटे समीर भुजबल पर राकांना ने इस बार नासिक लोस क्षेत्र से उम्मीदवारी दी है। इस लिहाज से मोटे तौर पर देखा जाए तो राज्य में आयोजित लोकसभा चुनाव में कांग्रेस-राकांपा के गठबंधन में राकांपा अधिकाधिक उम्मीदवार अपनी पारिवारिक राजनीति को आगे बढ़ाने को श्रेय मिला है।

शिवसेना से जाकर राकांपा का थामा दामन…

इसके अलावा राकांपा की ओर से ठाणे लोस चुनाव क्षेत्र से आनंद परांजपे को उम्मीदवारी मिली है, लेकिन ये मूलत: शिवसेना से थे, जिन्होंने पिछली बार राष्ट्रवादी कांग्रेस का दामन थाम लिया था। साथ ही धनराज महाले भी पहले शिवसैनिक हुआ करते थे, जिन्हें आगामी लोकसभा चुनाव के लिए राकांपा ने डिंडोरी लोस क्षेत्र से मैदान में उतारा है। इसके अलावा ये सभी उम्मीदवार पहले तो अपनी शिक्षा के अनुसार काम किए, फिर पारिवारिक राजनीति को आगे बढ़ाने के लिए सभी ने स्थानीय लेवल पर नेता के रूप अपनी अलग पहचान बनाई। इसके बाद उम्मीदवारों को उनके घर वालों के भरोसे चुनाव मैदान में उतार दिया गया।

ये हैं फ्रेश चेहरे…

लोकसभा चुनाव में जहां इस बार पहले से राजनीति में चाशनी छान रहे लोगों के परिवार वालों को मौका मिला है, तो वहीं कांग्रेस की ओर से रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग लोस सीट से नवीनचंद्र बंदिवडेकर और कुणाल पाटील को धुले लोस क्षेत्र से पार्टी ने पहली बार फ्रेश चेहरों को मौका दिया है। हालांकि कुणाल राजनीति में फ्रेश जरूर हैं, लेकिन वे वरिष्ठ कांग्रेसी नेता रोहिदास पाटील के बेटे होने का पूरा लाभ मिल रहा है। वहीं दूसरी ओर मराठी इंडस्ट्री के नामचीन अभिनेता अमोल कोल्हे को जहां राकांपा ने शिरूर से तो वहीं बजरंग सोनवणे पर बीड लोस सीट से पहली बार भरोसा जताया है। वहीं पार्थ पवार भी लोकसभा चुनाव में पहली बार नजर आ रहे हैं, जो राजनीतिक रूप से फ्रेश हैं, लेकिन इन्हें वरिष्‍ठ राकांपा नेता अजीत पवार के बेटे होने का गौरव प्राप्त है।

पैराशूट बनकर उभरे ये…

नागपुर में भाजपा के कद्दावर नेता नितिन गडकरी को कड़ी टक्कर देने के लिए के लिए कांग्रेस ने नाना पटोले को मैदान में उतारा है। पटोले को पैराशूट प्रत्याशी माना जा सकता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नाना पटोले ने भंडारा-गोदिंया सीट पर भाजपा की टिकट पर चुनाव जीता था, लेकिन भाजपा में मतभेद के चलते उन्होंने बीच टर्म में इस्तीफा देकर कांग्रेस का दामन थाम लिया।

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