रास्ते पर रहने को मजबूर 71 हजार बच्चे, 23 हजार हैं शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार…

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सरकार के दावे निकले खोखले, सर्वेक्षण में तीन बड़े शहरों के आंकड़े हुए उजागर
रास्ते पर रहने को मजबूर 71 हजार बच्चे
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सरकार के दावे निकले खोखले, सर्वेक्षण में तीन बड़े शहरों के आंकड़े हुए उजागर


– NDI24 नेटवर्क


मुंबई. सरकार के दावों की पोल खोलती हुई एक संस्था के सर्वे में उजागर हुआ है कि स्कूल जाने बच्चों की संख्या घट गई है, जबकि बाल मजदूरों की की संख्या में इजाफा हुआ है। महाराष्ट्र में जहां हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है, वहीं मुंबई, पुणे, नासिक जैसे राज्य के तीन बड़े शहरों में सड़कों पर 71 हजार बच्चें सड़कों पर रहने को मजबूर हैं, जिनमें 23 हजार बच्चे तो शारीरिक और मानसिक शोषण का शिकार तक हो गए हैं। सेव द चिल्ड्रन अंतरराष्ट्रीय निजी संस्था ने न्यू विजन सलाम बालक ट्रस्ट और हमारा फाउंडेशन संस्थाओं के साथ मिलकर महाराष्ट्र, दिल्ली समेत उत्तर प्रदेश पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में सड़कों पर रहने वाले बच्चों का सर्वे किया। सर्वे रिपोर्ट के मानें तो 12-18 साल के करीब 20 लाख बच्चे सड़कों पर रहने को मजबूर हैं।

मुंबई में 52 हजार 536 बच्चे पीड़ित…

मिली जानकारी के अनुसार, रास्तों पर रहने वाले प्रत्येक तीन बच्चों में से एक करीब 23 हजार बच्चे शारीरिक मानसिक शोषण से ग्रस्त पाए गए हैं। इनमें से करीब 44 हजार 700 बच्चों को पढ़ना-लिखना तक नहीं आता। चार में से एक बच्चे को रोज भूखा भी सोना पड़ रहा है। इसके अलावा रास्ते पर रहने वाले बच्चों में से 70 प्रतिशत यानी 49 हजार 700 बच्चे मजदूरी तक करने को मजबूर होते हैं। मुंबई, पुणे नासिक जैसे बड़े शहरों में सर्वे हुआ तो पता चला कि 2018 में इन तीनों शहरों में 71 हजार 058 बच्चे में से 52 हजार 536 मुंबई के हैं तो वहीं पुणे में 14 हजार 627, जबकि नासिक में 3 हाजर 895 बच्चे सड़कों पर रहने को मजबूर हैं और पेट भरने के लिए बाल मजदूरी भी कर रहे हैं।

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