श्रीरामनगर रामलीला कथा मंचन का 4था दिन

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श्रीरामनगर रामलीला कथा मंचन का 4था दिन
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” नाथ संभु धनु भंजनी हार, होइए कोउ एक दास तुम्हारा”

– NDI24 नेटवर्क
नालासोपारा.  तालुका का सुप्रसिद्ध श्रीराम नगर रामलीला मंडल द्वारा श्रीराम कथा मंचन के चौथे दिन है| जनकपुर में सीता के स्वयंवर की तैयारी चल रही है| दूर-दूर के राजा और महाराजा धनुष तोड़ना के लिए आते है| विश्वमित्र के साथ लक्ष्मण सहित राम भी जनकपुर पहुंचते हैं| धनुष तोड़ने पर क्रोधित हुए परशुराम भी वहां पहुंचते है और उपस्थित राजा व महाराजाओं को चेतावनी देते हुए संपूर्ण पृथ्वी को तहस-नहस करने की बात कहते हैं| तभी प्रभु श्रीराम उनके सामने विनम्र भाव से – नाथ संभु धनु भंजनी हार, होइए कोउ एक दास तुम्हारा”|  “रंग भूमि आये दोउ भाई, असि सुधि सब उर बासिंह पाई। चले सकल गृह काज बिसारी बाल जुबान जरठ नर नारी|| ” इसी बीच प्रभु श्रीराम व लक्ष्मण का पदार्पण विश्वामित्र के साथ होता है। इन दोनों बालको के यज्ञशाला में पहुचने की जानकारी मिलते ही जनकपुर के सभी बड़े, बूढ़े, बच्चे, नर और नारी उन्हें दखने के लिए आपने सारे काम काज को छोड़कर चल दिए। और आपस में विचार करने लगे की यही बालक इस धनुष को तोड़ेंगे।जनक अपने वचन को सभी राजाओं के बीच सुनाते है जो इस शिव के धनुष को तोड़ेगा उसी से बेटी सीता का स्वयम्बर रचाया जायेगा। एक-एक कर सभी राजा धनुष तोड़ने का प्रयास करते हैं, लेकिन किसी को सफलता नही मिली। जनक ने कहा क्या पृथ्वी वीरों से खाली है। इस पर विश्वामित्र कहते है। “उठहु राम भंजहु भवः चापा, मेटहु तात जनक परितापा” प्रभु धनुष को तोड़ देते है। इससे क्रोधित होकर परशुराम सभा में पहुचते है। धनुष टूटने को लेकर परशुराम व लक्ष्मण के बीच संवाद होता है। परशुराम से कहते है। राम रमापती कर धनु लहू, खेचहु चाप मिटे संदेहु, परशुराम आश्वस्त होकर वन की ओर प्रस्थान करते है। राम और सीता का स्वयम्बर होने के साथ ही विवाह की तैयारियां शुरू होती है।
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