2 October विशेष : क्या आप जानते हैं, महात्मा गांधी ने नेहरू के लाख विरोध के बावजूद बंटवारे के बाद दिलवाये थे 50 लाख रुपये…

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हिंसा के सहारे नहीं, बल्कि अहिंसा के बल पर भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी
2 October विशेष : क्या आप जानते हैं
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हिंसा के सहारे नहीं, बल्कि अहिंसा के बल पर भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी

– NDI24 नेटवर्क
मुंबई. आज राष्ट्रपति महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। इस मौके पर देश ही नहीं पूरी दुनिया में लोग बापू को याद कर रहे हैं और उन्हें अपने-अपने तरीके से श्रद्धांजलि दे रहे हैं। महात्मा गांधी ने नेहरू के लाख विरोध के बावजूद बंटवारे के बाद 50 लाख रुपये दिलवाये थे। यह राशि उस समय काफी महत्वपूर्ण और बड़ी मानी गयी थी। बंटवारे के दौरान हुए हुए सांप्रदायिक दंगों से भी वो बहुत दुखी थे। बंटवारा भले ही हो गया था, लेकिन लो पाकिस्तान को किसी भी तरह अलग मानने को तैयार न थे। गांधी जयंती के मौके पर आज हम आपको बापू के कुछ ऐसे अनमोल वचनों से आपको रूबरू कराने जा रहे हैं, जिनको पालन राष्ट्रपिता ताउम्र करते रहे। उन्होंने हिंसा के सहारे नहीं, बल्कि अहिंसा के बल पर भारत की आजादी की लड़ाई लड़ी और हिन्दुस्तान को आजादी दिलाई।

धीरे-धीरे आपको दुनिया सुनेगी…

आप मुझे जंजीरों में जकड़ सकते हैं, यातना दे सकते हैं, यहां तक की आप इस शरीर को नष्ट कर सकते हैं, लेकिन आप कभी मेरे विचारों को कैद नहीं कर सकते। थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है। राष्ट्रपिता का कहना था कि हमें उपदेशों से ज्यादा अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। इसीलिए उन्होंने कहा थोड़ा सा अभ्यास बहुत सारे उपदेशों से बेहतर है। खुद वो बदलाव बनिये जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। गांधी जी का कहना था कि दूसरों की जगह खुद ही वो काम करना शुरु कर दें जिसे आप किसी अन्य से कराना चाहते हैं। इसीलिए उन्होंने कहा, खुद वो बदलाव बनिये जो आप दुनिया में देखना चाहते हैं। भगवान का कोई धर्म नहीं है, उनका कहना था कि धर्म के नाम पर लड़ने वाले नहीं जानते कि भगवान का कोई धर्म नहीं है जिसके लिए सब एक-दूसरे से लड़ते रहते हैं। मौन सबसे सशक्त भाषण है। धीरे-धीरे दुनिया आपको सुनेगी।

व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है…

आप तब तक यह नहीं समझ पाते कि आपके लिए कौन महत्त्वपूर्ण है जब तक आप उन्हें वास्तव में खो नहीं देते। विश्व के सभी धर्म, भले ही और चीजों में अंतर रखते हों, लेकिन सभी इस बात पर एकमत हैं कि दुनिया में कुछ नहीं बस सत्य जीवित रहता है। सत्य एक है, मार्ग कई। खुशी तब मिलेगी जब आप जो सोचते हैं, जो कहते हैं और जो करते हैं, सामंजस्य में हों। व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है।

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